||| टिमटिमाती तारे बिजली का था |||

बढ़ती, टिमटिमाती तारो की तरह

पर गिन सकते थे 

कही गाढ़े, कहीं एका–दुका बिखरे जैसे थे

बस एक ही फासला इनमे था टिमटिमाती तारे बिजली का था

एक जो गगन का बिंदि था वहीं दूसरा इस धरती का बत्ती(खोजा हुवा) था

एक जो कहीं से भी दिखाई पड़ता था वहीं दूसरा हर कदम पर धुंधला पड़ता था

ठीक  हू –ब –हू  हमारी यादें की तरह

पीछा करता तारो की तरह

पर ये साया गायब हो रहा होता बिल्कुल तारो की तरह

अब थी एक नई सुबह, नई दिशा जो लेकर जाती पवन की तरह।।।


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