||| डायन |||
थस सा जा रहा, उभरे हड्डियां अब सब कुछ बयां करती हैं,
हाथ फैला लेने को मजबूर करती है, तन पर लपेटे पतली सी गंदी लिबास , नंगे पांव पैर के ऊपर कई घाव के दाग , करती हैं यदा एक फ़कीर की,
चिंताएं रहती उसे सिर्फ दो वक्त रोटी की,
घटती वर्षो की उम्र , लटके झुर्रियां अब सब कुछ बयां करती हैं, सफेद होते बाल अब हमे "डायन" कहा करती हैं, डरते है लोग जो चेहरा भूत की,
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