||| कब तक, कहां तक भागो गे |||

कब तक, कहां तक भागो गे |2|
कब तक, और क्या–क्या छोड़े गे
निकल जायेगी ज़िंदगी फिर पछताओगे
एक बात बताऊं मैं–"अगर भागने की वजह ढूढोगे
तो शायद कुछ मिले या न मिले पर खुद को पहचान पाओगे, खुद से लड़ पाओगे 
हू–ब–हू पतझड़ ऋतु की तरह एक नई ज़िंदगी से जी पाओगे"
कब तक, कहां तक भागो गे 
कब तक, और क्या–क्या छोड़े गे
एक और बात बताऊं –"अगर योजना के साथ बढ़ेगो
तो शायद ख़ुद पर विश्वास कर पाओगे
कब तक, और क्या–क्या छोड़े गे
कब तक, कहां तक भागो गे ।।।











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