लाइफ साइकिल|| LIFE CYCLE ||
मैं अक्सर अकेला होता हूं जब रोता हूं तब कुछ अच्छा और बुरा का एहसास करता हूं किसी से दूर, कमियां और न जाने क्या क्या महसूस करता हूं और अंत में जब आंखो से आंसू निकल गिर जाते है तब कुछ हल्का सा लगता है कोशिश करता हूं खुश रहने का, पर ऐसा लगता हैमानो पिछे से कोई जकड़ता है और कुछ बुदबुदाने सा केहता है तो अचानक मै सोचता हूं न जाने किस लिए मैं रोता हूं और फिर जो मेरे पास है अभी उसकी परवाह करता हूं । कुछ नया और अलग सोचता हूं और फ़िर क्या निकल पड़ता हूं अपने वादे को पूरा करने फिर समय की इस रफतार में जहां से शुरूवात करता हूं शायद वापिस वहीं आ जाता हूं और फ़िर मैं अक्सर रोता हूं जब मैं अकेला होता हूं फिर से सोचता हूं और निकल पड़ता हूं यही कोई पहिए जैसा गोल गोल घुमाता रहता हूं