जाने वाले से कैसे पूछे
जाने वाले से कैसे पूछे क्या बताना चाहता था किसकी फिक्र थी किससे मिलना का दिल था उल्टे पहिये में भी उम्मीदे बहुत थी जाने वाले से कैसे पूछे क्या खाने का मन था किसे एक झलक देख लेने का दिल चाहता था उल्टे पहिये में भी उम्मीदे बहुत थी पर वक्त उससे भी तेज़ दौड़ रहा था जो टली न अबतक उसी का इंतजार था रब की इस रुहाई में किसे पता कब तक मुक्त की सांस मिलनी थी दौड़ता वक्त अब उनसे जीत चुका था